नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, परिषद द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में उचित पैरवी न होने और प्रशासनिक लापरवाही सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लिया है।
जानकारी के मुताबिक, एनसीईआरटी ने एक निजी कंपनी को पाठ्यपुस्तकों के उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए उसकी खरीद प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। इस फैसले को संबंधित कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी की ओर से कोई अधिकृत प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते अदालत ने कंपनी को अंतरिम राहत प्रदान कर दी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय ने यह जानने का प्रयास शुरू कर दिया है कि अदालत में एनसीईआरटी का पक्ष प्रभावी ढंग से क्यों नहीं रखा गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ।
सूत्रों के अनुसार मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच में अधिकारियों की लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में अदालत के समक्ष उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बताया जा रहा है कि जिस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, उस पर आवश्यक पात्रता शर्तों का पालन नहीं करने के आरोप थे। अब शिक्षा मंत्रालय ने एनसीईआरटी से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कंपनी का चयन किन मानकों और प्रक्रियाओं के आधार पर किया गया था तथा बाद में उसके खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी।
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बैंक गारंटी से जुड़ा भी बताया जा रहा है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कंपनी द्वारा जमा कराई गई बैंक गारंटी को भुनाने पर भी अंतरिम रोक लगा दी है। इससे विवाद और अधिक संवेदनशील हो गया है तथा मंत्रालय पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है।
शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं को कानूनी मामलों में अधिक सतर्क और जवाबदेह रहने की आवश्यकता है। मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में किसी भी महत्वपूर्ण मुकदमे में संस्थान की ओर से समय पर और प्रभावी पैरवी हो ताकि सरकारी हितों को नुकसान न पहुंचे।
इस घटनाक्रम के बाद एनसीईआरटी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली, कानूनी तैयारी और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। मंत्रालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।